मूली की खेती कैसे करे पूरी जानकारी। Mooli Ki Kheti Kaise Kare In Hindi

Mooli Ki Kheti Kaise Kare In Hindi - नमस्कार मेरे प्यारे किसान भाई। आज की पोस्ट में हम मूली की खेती पर बात करेंगे जैसे Mooli Ki Kheti Karne Ka Tarika और Mooli Ki Kheti Kab Ki Jaati Hai है। कई बार Kisan को Mooli Ki Kheti Ki Jaankari नहीं होती है परिणामस्वरूप अच्छा लाभ नहीं कमा पाता है। अब आप के मन में प्रशन आ रहा है की Mooli ki Kheti Kab Kare तो में बताना चाहता हु आप हमारे साथ Kheti Business पर बने रहे हम सभी जानकारी बताने वाले है। 
Mooli Ki Kheti
Mooli Ki Kheti

मूली अत्यन्त महत्वपूर्ण सब्जी है इसे कच्चा सलाद के रूप में या अचार बनाने के प्रयोग में भी लाते है इसकी खेती पूरे भारतवर्ष में की जाती है इसका उत्पादन मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, बिहार, पंजाब, असाम, हरियाण, गुजरात, हिमांचल प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश में किया जता है

Mooli Ki Kheti के लिए जलवायु और भूमि

मूली की खेती के लिए किस प्रकार की जलवायु एवं भूमि होनी चाहिए ?
यह ठन्डे मौसम की फसल है इसके बढ़वार हेतु 10 से 15 डिग्री सेंटीग्रेट अच्छा तापक्रम होता हैI अधिक तापक्रम पर जड़े कड़ी तथा कड़वी हो जाती है। मूली का अच्छा उत्पादन लेने हेतु जीवांशयुक्त दोमट या बलुई दोमट भूमि अच्छी होती है भूमि का Ph मान 6.5 के निकट अच्छा होता है।



 Mooli Ki प्रमुख प्रजातियाँ

वह कौन सी प्रमुख प्रजातियां है जिनका इस्तेमाल मूली की खेती करते वक्त हम करे ?
मूली की प्रजातियां जैसे की जापानी सफ़ेद, पूसा देशी, पूसा चेतकी, अर्का निशांत, जौनपुरी, बॉम्बे रेड, पूसा रेशमी, पंजाब अगेती, पंजाब सफ़ेद, आई.एच. आर1-1 एवं कल्याणपुर सफ़ेद है। शीतोषण प्रदेशो हेतु ह्वाइट इसली, रैपिड रेड, ह्वाइट टिप्स, स्कारलेट ग्लोब तथा पूसा हिमानी अच्छी प्रजातियां है। 

Mooli के खेत की तैयारी

मूली की खेती के लिए किसान भाई अपने खेत की तैयारी किस प्रकार से करे ?
Mooli Ki Kheti
Mooli Ki Kheti

मूली की खेती वर्षा समाप्त होने के बाद की जाती है। पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा दो-तीन जुताई कल्टीवेटर या देशी हल से करके खेत को भुरभुरा बना लेना चाहिएI जुताई करते समय 200 से 250 कुंतल सड़ी गोबर की खाद मिला देना चाहिए। 

Mooli की बीज बुवाई

मूली की खेती हेतु बीज पर पार्टी हेक्टेयर कितनी मात्रा लगती है और बीजों का शोधन हमारे किसान भाई किस प्रकार करे ?

मूली का बीज 10 से 12 किलोग्राम प्राति हेक्टेयर पर्याप्त होता हैI मूली के बीज का शोधन 2.5 ग्राम थीरम से एक किलोग्राम बीज की दर से उप शोधित करना चाहिए। 
मूली की फसल की बुवाई कब करे और किस विधि से करे ?
मूली की बुवाई अक्टूबर माह में की जाती है। लेकिन कुछ प्रजातियों की बुवाई अलग-अलग समय पर की जाती है। जैसे की पूसा हिमानी की बुवाई दिसम्बर से फरवरी तक की जाती है तथा पूसा चेतकी प्रजाति को मार्च से मध्य अगस्त माह तक बोया जाता है बुवाई मेड़ों तथा समतल क्यारियो में भी की जाती है। लाइन से लाइन या मेड़ों से मेंड़ो की दूरी 45 से 50 सेंटीमीटर तथा उचाई 20 से 25 सेंटीमीटर रखी जाती हैI पौधे से पौधे की दूरी 5 से 8 सेंटीमीटर राखी जाती है बुवाई 3 से 4 सेंटीमीटर की गहराई पर करनी चाहिए। 

Mooli Ki Kheti का पोषण प्रबंधन

मूली की फसल में खाद एवं उर्वरको का प्रयोग कैसे करे और कितनी मात्रा में करे ?
200 से 250 कुंतल सड़ी गोबर की खाद खेत की तैयारी करते समय देनी चाहिए इसके साथ ही 80 किलोग्राम नत्रजन, 50 किलोग्राम फास्फोरस तथा 50 किलोग्राम पोटाश तत्व के रूप में प्रति हेक्टेयर प्रयोग करना चाहिए। नत्रजन की आधी मात्रा फास्फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई से पहले तथा नत्रजन की आधी मात्रा दो बार में खड़ी फसल में देना चाहिए जिसमे नत्रजन 1/4 मात्रा शुरू की पौधों की बढ़वार पर तथा 1/4 नत्रजन की मात्रा जड़ों की बढ़वार के समय देना चाहिए। 

Mooli Ki Kheti का जल प्रबंधन

मूली की फसल में कब सिंचाई करनी चाहिए और कितनी मात्रा में करनी चाहिए ?
पहली सिंचाई तीन चार पत्ती की अवस्था पर करनी चाहिए। मूली में सिंचाई भूमि के अनुसार कम ज्यादा करनी पड़ती है। सर्दियों में 10 से 15 दिन के अंतराल पर तथा गर्मियों में प्रति सप्ताह सिंचाई करनी चाहिए। 

Mooli Ki Kheti का खरपतवार प्रबंधन

मूली की फसल में निराई-गुड़ाई और खरपतवारों का नियंत्रण हमें कैसे करना चाहिए किस प्रकार से करना चाहिए और क्या सावधानी बरतनी चाहिए ?
Mooli Ki Kheti
Mooli Ki Kheti

पूरी फसल में 2 से 3 निराई-गुड़ाई करनी चाहिए। जब जड़ों की बढ़वार शुरू हो जावे तो एक बार मेंड़ों पर मिट्टी चढ़ानी चाहिए। खरपतवार नियंत्रण हेतु बुवाई के तुरंत बाद 2 से 3 दिन के अंदर 3.3 लीटर पेंडामेथलीन 600 से 800 लीटर पानी के साथ घोलकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए। 

Mooli Ki Kheti का रोग प्रबंधन

मूली की फसल में कौन-कौन से रोग लगाने की सम्भावना होती है और उसके नियंत्रण हेतु क्या करे ?
मूली में ह्वाइट रस्ट, सरकोस्पोरा कैरोटी, पीला रोग, अल्टरनेरिया पर्ण, अंगमारी रोग लगते है। इन्हे रोकने के लिए फफूंद नाशक दवा डाईथेन एम् 45 या जेड 78 का 0.2% घोल से छिड़काव करना चाहिए। बीज उपचारित होना चाहिए 0.2% ब्लाईटेक्स का छिड़काव करना चाहिए। पीला रोग के नियंत्रण हेतु इंडोसेल 2 मिलीलीटर प्रति लीटर या इण्डोधान 2 मिलीलीटर प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए। 

Mooli Ki Kheti का कीट प्रबंधन

मूली की फसल में कौन-कौन से कीट लगते है और उनके नियंत्रण के लिए क्या उपाय करने चाहिए ?
किसान भाइयो रोग के साथ-साथ कीटो का भी प्रकोप होता है।  मूली में मांहू, मूंगी, बालदार कीड़ा, अर्धगोलाकार सूंडी, आरा मक्खी, डायमंड बैक्टाम कीट लगते है। इनकी रोकथाम हेतु मैलाथियान 0.05 % तथा 0.05 % डाईक्लोरवास का प्रयोग करना चाहिए।  थायोडान, इंडोसेल का 1.25 लीटर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिएI 10% बी.एच.सी. या 4% कार्बेरॉल का चूर्ण का भी बुरकाव करना चाहिए। 

Mooli Ki Kheti की फसल कटाई

मूली की फसल के कटाई का सही समय क्या है ?
किसान भाइयो कटाई हेतु जब खेत में मूली की जड़े खाने लायक हो जावे अर्थात बुवाई के 45 से 50 दिन बाद जड़ो को सुरक्षित निकालकर सफाई करके बाद में बाजार में बेंच देना चाहिएI इन्ही जड़ो को सलाद एवं अचार बनाने में प्रयोग करते है। 

Mooli Ki Kheti की पैदावार

मूली की फसल में प्रति हेक्टेयर लगभग कितनी पैदावार प्राप्त कर सकते है?
Mooli Ki Kheti

सभी तकनीको को अपनाते हुए खाने योग्य जड़ो की पैदावार 150 से 200 कुंतल प्रति हेक्टेयर प्राप्त होती है।

सभी किसान भइओ से आशा करता हु आप को दी गई जानकारी बहुत फायदेमंद रही है। अगर आप के इसके अलावा मूली की खेती से जुड़ा कोई प्र्शन है तो आप हमे कमेंट कर पूछ सकते है हम जल्द ही आपका जवाब देंगे। 

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